Ekadashi Vrat Mahatmya Katha - एकादशी महात्म्य कथा

"हरे कृष्णा" जी आज आप इस लेख के माध्यम से एकादशी महात्म्य (Ekadashi Vrat Mahatmya Katha) की कथा पढेंगे जो की बहुत ही पुण्यकारी है. इससे पहले के लेखों में हमनें "एकादशी क्या है", "एकादशी कब है", "एकादशी के लाभ" आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर ली है. एकादशी का महात्म्य हमनें "पद्मपुराण" से लिया है, तो चलिए शुरू करते हैं.

एकादशी व्रत महात्म्य कथा

श्री सूत जी महाराज शौनक आदि 88 हजार ऋषियों से बोले :- हे महर्षियों ! एक वर्ष के अन्दर कुल 12 महीनें होते है और एक महीने में दो एकादशी होती है. इस प्रकार एक वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं. जिस वर्ष लौंद यानि अधिक मास पड़ता है उस वर्ष दो एकादशी बढ़ जाती हैं. इस तरह कुल 26 एकादशी होती है जिनके नाम कुछ इस प्रकार है.
1) उत्पन्ना एकादशी
2) मोक्षदा एकादशी (मोक्ष प्रदान करने वाली)
3) सफला एकादशी (सफलता देने वाली)
4) पुत्रदा एकादशी (पुत्र देने वाली)
5) षट्तिला एकादशी
6) जया एकादशी
7) विजया एकादशी
8) आमला एकादशी
9) पाप मोचनी एकादशी (पापों को नष्ट करने वाली)
10) कामदा एकादशी
11) बरूथनी एकादशी
12) मोहिनी एकादशी
13) अपरा एकादशी
14) निर्जला एकादशी
15) योगिनी एकादशी
16) देवशयनी एकादशी
17) कामिका एकादशी
18) पुत्रदा एकादशी
19) अजा एकादशी
20) परिवर्तिनी एकादशी
21) इंद्रा एकादशी
22) पापांकुशा एकादशी
23) रमा एकादशी
24) देवोत्थान एकादशी
जिस वर्ष में लौंद अथवा अधिक मास पड़ता है उन दोनों एकादशीयों के नाम पद्मिनी और परमा एकादशी है. यहाँ जीतनी भी एकादशी है सभी यथा नाम तथा गुण वाली हैं. इन एकादशीयों के नाम तथा गुण उनके व्रत की कथा सुनने से मालूम होंगे. जो भी मनुष्य इन एकादशीयों के व्रत को शास्त्रनुसार करते हैं, उन्हें उसी के फल की प्राप्ति होती है. यदि आपको इनमें से किसी भी एकादशी का महात्म्य या कथा पढ़नी है तो आप ऊपर दिए गए एकादशी के नाम पर क्लिक करें.

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