एकादशी क्या है (Ekadashi Kya Hai) - Vrat Katha, Vidhi, Benefits

जय श्री हरी : सनातन धर्म के अनुसार प्रत्येक महीने की एकादशी तिथि को श्री भगवान् विष्णु की पूजा की जाती है. इसी दिन एकादशी का व्रत रखा जाता है जो की भगवान् विष्णु को अत्यंत प्रिय है. मानव समाज के लिए एकादशी व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण एवं पुण्यकारी माना जाता है. आज इसी एकादशी व्रत की महिमा के बारे में हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे.

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कई हरी भक्त हमारे मंदिर में आते है और पूछते है की प्रभु जी “एकादशी क्या है”, “एकादशी कौन है”, “एकादशी कैसे प्रकट हुई”, “एकादशी का व्रत क्यों रखना चाहिए”, “एकादशी का महत्त्व क्या है”, “एकादशी के लाभ क्या है”, “एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए”, “एकादशी का व्रत कब खोलना चाहिए”.

एकादशी कैसे प्रकट हुई

हमारे शास्त्रों में बताया गया है की जब भगवान् ने इस श्रष्टि की रचना की तो सभी देवता, दानव, मनुष्य, जीव जंतु, कीट आदि उत्पन्न हुए साथ ही साथ हर प्रकार के पाप भी उत्पन्न हुए. जब सभी पाप उत्पन्न हुए तो उन्हीं पापों से एक पाप पुरुष की भी रचना हुई अथार्त सभी पाप उसी पाप पुरुष के अंग बने. इसके साथ ही यमराज भी उत्पन्न हुए जो की पाप करने वालों को नरक में सजा देने हैं.

जब भगवान् ने देखा की सभी मनुष्यों का पापों की तरफ अधिक आकर्षण है और इसके फलस्वरूप उनको बार-बार नरकों में भेजा जाता है और दंडित किया जाता है तो भगवान् को दया आई और भगवन ने अपने शरीर से एकादशी को प्रकट किया. वैदिक गणना के अनुसार दो पक्ष होते है एक शुक्ल पक्ष और एक कृष्ण पक्ष यह दोनों पंद्रह-पंद्रह दिन के होते है. जब इन दोनों पक्षों को जोड़ा जाता है तब एक महिना होता है. तो दोनों पक्षों में एक - एक एकादशी आती है.

एकादशी का व्रत क्यों रखना चाहिए

जब एकादशी प्रकट हुई तो भगवान् ने उसका नाम एकादशी रखा क्योंकि वह ग्यारवें दिन उत्पन्न हुई थी. फिर भगवान् ने कहा की जो भी लोग एकादशी का व्रत रखेंगे वह पापों से मुक्त हो जायेंगे और पुण्यवान हो जायेंगे. जब लोगों ने एकादशी का व्रत प्रारम्भ किया तो सभी लोग पुण्यवान बनने लगे और जो पाप पुरुष था वह परेशान हो गया और सोचने लगा की भगवान् ने ही मुझे उत्पन्न किया है लेकिन एकादशी के प्रभाव से यह लोग तो पाप नहीं कर पा रहे हैं. इन सब से परेशान होकर पाप पुरुष भगवान् के पास गया और कहने लगा की आपने ही मुझे उत्पन्न किया लेकिन आज में एकादशी के प्रभाव से कुछ कर ही नहीं पा रहा हूँ और हमारा पतन हो रहा है. तो फिर भगवान् ने कहा की अगर एकादशी का आप लोगों पे इतना असर हो रहा है तो आप लोग ग्यारवें दिन अन्न में प्रवेश कर जाओ जिससे आपका बचाव हो जायेगा.

तब से लोग एकादशी का व्रत करने लगे और जो लोग यह व्रत नहीं करते उनको वो सभी पाप भी लग जाते हैं जो उन्होंने किये है नहीं. क्योंकि एकादशी के दिन अन्न में सभी प्रकार के पाप प्रवेश कर जाते हैं फिर चाहे वह गौ हत्या का पाप हो, माता पिता की हत्या का पाप हो, ब्राह्मण की हत्या का पाप हो, झूट बोलने का पाप हो, चोरी करने का पाप हो आदि सभी प्रकार के पाप उस दिन अन्न के अन्दर होते है. इसलिए हमें उस दिन किसी भी अवस्था में अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए.

एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए

वैसे तो एकादशी में हमें सिर्फ पाप से ही नहीं बचना चाहिए बल्कि कुछ तपस्या भगवान् को प्रशन्न करने के लिए भी करना चाहिए. लेकिन यदि आप पूरी तरह से भूखे नहीं रह सकते तो आप फल, दूध, कुट्टू का आटा, साबूदाना आदि का सेवन कर सकते हैं लेकिन उतना ही जितना आपको भगवान् का गुणगान करने की शक्ति दे क्योंकि यदि आप बहुत ज्यादा अथवा पेट भर के खाते है तो फिर तपस्या नहीं हो पायेगी और आप भगवान् की कृपा से वंचित रह जायेंगे. कहने का अर्थ है की एकादशी के दिन किसी भी प्रकार के अन्न का सेवन नहीं करें और भगवान् के नाम का जाप करें उसके लिए आपके पास हरे कृष्ण महामन्त्र है जिसका आपको जाप करना चाहिए. एकादशी के दिन मंत्र जाप के साथ ही श्री मदभगवतगीता या भागवतम को भी पढना चाहिए.
“हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्ण कृष्ण हरे हरे

हरे राम हरे रामा राम रामा हरे हरे” 


एकादशी का व्रत कब खोलना चाहिए

कई बार लोग रात को ही 12 तक अन्न खा लेते हैं लेकिन हमें मालूम होना चाहिए की एकादशी का व्रत पारण करने का समय अगले दिन होता है. अगले दिन सुबह 6 से लेकर 10 तक का समय इसके लिए सबसे अच्छा होता है. कहने का अर्थ है की यदि हम एकादशी व्रत कर भी रहे हैं और सब कुछ गलत तरीके से होता है तो फिर एकादशी का हमें कोई लाभ होने वाला नहीं है. इसलिए अगले दिन हमें सुबह 6-10 के बीच जो भी प्रसाद बनाया है उसको सबसे पहले भगवान् को भोग लगाना चाहिए उसके बाद ही ग्रहण करना चाहिए इससे हम सभी प्रकार के पापों से सुरक्षित रहते हैं. इसलिए सभी भक्तों को चाहिए की और कोई व्रत रखें या न रखें लेकिन एकादशी का व्रत अवश्य रखना चाहिए. सिर्फ इतना ही नहीं अगर हम यह एकादशी का व्रत रखते हैं सभी पापों से तो बचते ही है साथ ही हमारी आध्यात्मिक उन्नति होती है और हमें भगवान् की कृपा भी प्राप्त होती है.
अंतिम शब्द: आप सभी हरी भक्तों को मेरा दंडवत प्रणाम यदि इस लेख में आपको किसी भी प्रकार की त्रुटी नजर आती है तो आप हमें निचे Comment करके जरुर बताएं और इस सेवा में अपना सहयोग देवें. आप हमसे इस लेख और आध्यात्म से संबधित सवाल भी पूछ सकते हैं उसके लिए हमें अगल से एक सवाल जवाब का पेज बनाया है.
"जय श्री कृष्णा"

एकादशी से संबधित अन्य जानकारी:

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